बलिया जिले के नगरा ब्लॉक अंतर्गत बरौली ग्राम पंचायत में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहां पिता की मृत्यु का सदमा सहन न कर पाने के कारण पुत्र की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद एक ही चिता पर पिता-पुत्र का अंतिम संस्कार किया गया।
बरौली निवासी 55 वर्षीय दूधनाथ बंसफोर पिछले दो वर्षों से क्षय रोग से पीड़ित थे और उनका सरकारी स्तर पर इलाज चल रहा था। शुक्रवार शाम को उनका निधन हो गया। दूधनाथ की मौत की खबर मिलते ही उनके सबसे छोटे बेटे, 35 वर्षीय वीरेंद्र गहरे सदमे में चले गए।
वीरेंद्र अपने बीमार पिता के इलाज के लिए अथक प्रयास कर रहे थे और मजदूरी करके उनका उपचार करा रहे थे। पिता की मृत्यु का यह गहरा आघात वीरेंद्र सहन नहीं कर सके। शनिवार को उन्हें हार्ट अटैक आया और उनकी भी मृत्यु हो गई।
इस दुखद घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पिता-पुत्र की शव यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। दोनों का अंतिम संस्कार सरयू नदी के किनारे दोहरीघाट पर एक साथ किया गया।
दूधनाथ के दूसरे पुत्र राजेंद्र ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वीरेंद्र मजदूरी करके पिता का इलाज करा रहा था। वीरेंद्र ने पिता को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन अंततः उनकी मृत्यु का सदमा उन्हें भी ले गया। इस घटना से बरौली ग्राम पंचायत में गहरा दुख व्याप्त है। यह त्रासदी पूरे गांव के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। (खबर में प्रयोग किया गया फोटो AI जनरेटेड है)
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